रोज़ की थाली में कुछ ऐसी चीज़ें होती हैं जो सामान्य लगती हैं, लेकिन मधुमेह में वे रक्त शर्करा को बिना किसी चेतावनी के बढ़ा देती हैं। इन्हें पहचानना ज़रूरी है।
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जब पाचन तंत्र भोजन को तोड़ता है, तो उसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज़ में बदलते हैं। कुछ खाद्य पदार्थ यह काम इतनी तेज़ी से करते हैं कि शरीर के पास प्रतिक्रिया देने का समय ही नहीं बचता — और शर्करा का स्तर अचानक उछल जाता है।
यह जानकारी किसी भी इलाज की जगह नहीं लेती, लेकिन यह आपको अपने डॉक्टर से बेहतर सवाल पूछने और समझदारी से खाना चुनने में ज़रूर मदद कर सकती है।
एक सामान्य दिन की यह झलक दिखाती है कि कुछ आम आदतें शर्करा को कैसे प्रभावित करती हैं
☀️ सुबह — नाश्ता
सफेद ब्रेड + मीठी चाय → शर्करा 30 मिनट में तेज़ी से बढ़ती है
🕙 10 बजे — स्नैक
बिस्किट या नमकीन → शर्करा फिर बढ़ती है, शरीर थका महसूस करता है
🍽️ दोपहर — खाना
सफेद चावल + मीठी लस्सी → बड़ा उछाल, लंबे समय तक शर्करा ऊंची रहती है
🌙 शाम — अगर बदलें
दाल + सब्ज़ी + रोटी → शर्करा धीरे और स्थिर रहती है, रात आरामदायक होती है
यह केवल एक सामान्य उदाहरण है। अपनी व्यक्तिगत आहार योजना के लिए डॉक्टर से मिलें।
इनमें से कई चीज़ें घर में आम होती हैं — पर मधुमेह में इन पर ध्यान देना ज़रूरी है
गुड़, चीनी, शरबत, मुरब्बा और पारंपरिक मिठाइयाँ — ये खाते ही रक्त में घुल जाती हैं और शर्करा का स्तर झटके से ऊपर उठा देती हैं। इनसे परहेज़ मधुमेह प्रबंधन की नींव है।
डिब्बाबंद फलों के रस और कोल्ड ड्रिंक में छिपी हुई शर्करा होती है जो लेबल पर अलग-अलग नामों से लिखी जाती है। ये बिना तृप्ति दिए शर्करा को तेज़ी से बढ़ाते हैं।
पाव, नान, बिस्किट, पेस्ट्री — इन्हें बनाने में पोषण हटा दिया जाता है। जो बचता है वह तेज़ी से पचकर शर्करा बन जाता है। साबुत अनाज कहीं बेहतर विकल्प है।
सॉसेज, कबाब, स्मोक्ड मीट और तले हुए चिकन में संतृप्त वसा ज़्यादा होती है। यह शरीर की इंसुलिन प्रतिक्रिया को धीमा करती है और दिल पर अतिरिक्त बोझ डालती है।
बाज़ार के तले हुए नाश्ते, फ्रेंच फ्राइज़, चिप्स और पैकेट खाने में ट्रांस फैट और नमक की अधिकता होती है। ये रक्तचाप और शर्करा दोनों को प्रभावित करते हैं।
अंगूर, केला, चीकू, खजूर और किशमिश में शर्करा की मात्रा अधिक होती है। मधुमेह में इनके विकल्प के रूप में अमरूद, पपीता या सेब अधिक उपयुक्त हो सकते हैं।
डालडा, हाइड्रोजनेटेड वनस्पति तेल और बाज़ारी सॉस में ट्रांस फैट होती है। यह रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचाती है और शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता को कमज़ोर करती है।
सूजी की खिचड़ी, सफेद चावल, नमकीन अचार, मीठे फ्लेवर्ड दही और शराब — ये सभी रक्त शर्करा या रक्तचाप को किसी न किसी तरह प्रभावित कर सकते हैं। इन्हें पूरी तरह बंद करना ज़रूरी है या नहीं — यह आपकी स्थिति पर निर्भर करता है।
हर शरीर अलग होता है। इसलिए किसी भी आहार संबंधी बदलाव से पहले अपने चिकित्सक या पोषण विशेषज्ञ से बात करना हमेशा सही रहता है।
मधुमेह में सबसे बड़ी चुनौती यह नहीं है कि क्या खाएं — बल्कि यह है कि कौन सी आम चीज़ें, जो बरसों से खाते आए हैं, अब सावधानी माँगती हैं। इन सात खाद्य पदार्थों की यह सूची इसी जागरूकता का हिस्सा है।
जब शरीर भोजन को ऊर्जा में बदलता है, तो इसकी गति पर बहुत कुछ निर्भर करता है। जो चीज़ें धीरे-धीरे टूटती हैं, वे शर्करा को स्थिर रखती हैं। जो तेज़ी से टूटती हैं, वे अचानक उछाल पैदा करती हैं — जो बार-बार हो तो शरीर पर असर डालता है।
यहाँ दी गई जानकारी शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और किसी चिकित्सीय सलाह की जगह नहीं लेती। अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार उचित निर्णय के लिए हमेशा किसी योग्य डॉक्टर से मिलें।
"मुझे नहीं पता था कि रोज़ पी जाने वाले पैकेट जूस में इतनी शर्करा होती है। जब से घर पर ताज़ा नींबू पानी बनाने लगा हूँ, सुबह की रीडिंग में फर्क दिखने लगा है।"
— देबाशीष सेन, कोलकाता
"मैदे की रोटी की जगह बाजरे और जौ की रोटी अपनाई। पहले अजीब लगा, लेकिन अब शरीर हल्का महसूस होता है। डॉक्टर ने भी यही सलाह दी थी।"
— अनुराधा तिवारी, वाराणसी
"मुझे हमेशा लगता था कि फल तो स्वास्थ्यवर्धक हैं। पर केला और अंगूर का असर मेरी शुगर पर देखा तो समझ आया। अब सेब और पपीता खाता हूँ।"
— जयंत पिल्लई, चेन्नई
"फास्ट फूड छोड़ना मुश्किल था क्योंकि परिवार को पसंद था। घर में ही स्वस्थ विकल्प बनाने लगी। अब परिवार भी खुश है और शुगर भी काबू में है।"
— मीना अग्रवाल, इंदौर
"सॉसेज और प्रसंस्कृत मांस बंद करने के बाद कोलेस्ट्रॉल भी बेहतर हुआ। डॉक्टर ने कहा कि यह आहार में बदलाव का असर है।"
— रफ़ीक अहमद, हैदराबाद
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ज़रूरी नहीं। कई मामलों में मात्रा और आवृत्ति कम करना काफी होता है। यह आपकी स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है। खुद से कोई भी कठोर निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ से मिलें।
ओट्स, मूंग दाल चीला, अंडे, बिना चीनी के दही या मुट्ठी भर नट्स — ये विकल्प आमतौर पर बेहतर माने जाते हैं। लेकिन हर व्यक्ति की ज़रूरत अलग होती है, इसलिए अपने आहार विशेषज्ञ से पूछें।
बिना चीनी या बहुत कम मीठे के साथ चाय या ब्लैक कॉफी आमतौर पर ठीक मानी जाती है। दूध और चीनी वाली मिठी चाय बार-बार लेने से शर्करा प्रभावित हो सकती है।
हाँ, खाने का समय और अंतराल दोनों महत्वपूर्ण हैं। बहुत देर तक भूखे रहने के बाद एकदम ज़्यादा खाने से शर्करा में बड़ा उतार-चढ़ाव हो सकता है। नियमित और छोटे हिस्से में खाना आमतौर पर बेहतर रहता है।
कुछ विशेषज्ञ इन्हें सीमित मात्रा में उचित मानते हैं, जबकि कुछ इनके दीर्घकालिक असर पर सवाल उठाते हैं। अपने डॉक्टर से पूछें कि आपकी स्थिति में ये उपयुक्त हैं या नहीं।